लेकिन ये तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि उन्हीं राजीव गांधी ने भारत को कंप्यूटरीकृत करने का सपना देखा था, उनके शासनकाल में टेलीफोन और दूर संचार
उद्योग में भारत में बुनियादी सुविधाएं बढ़ीं. राजीव गांधी ने भारत को
21वीं सदी में ले जाने का सपना देखा था और उसको लेकर कई ज़रूरी कदम उठाए
थे.
लेकिन यह सब बातों का ख्याल नरेंद्र मोदी क्यों करेंगे. जब वो राजीव गांधी को निशाना बना रहे थे तो उन्हें संभवत यह बात भी याद नहीं रही कि उनके अपनी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण ऑन कैमरा रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे. पार्टी के एक और नामचीन नेता दिलीप सिंह जूदेव ऑन कैमरा कहते हुए पकड़े गए थे- पैसा खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम भी नहीं.
हालाँकि नरेंद्र मोदी के भाषणों में तथ्यों के साथ हेरफेर और व्यक्तिगत हमले करना कोई नहीं बात नहीं है. वे किसी को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड बता सकते हैं, कभी विपक्ष की सभी नेताओं को जेल भेजने की धमकी दे सकते हैं. बावजूद इन सबके उनके ताजा बयान से दो ही बात जाहिर हो रही है.
पर इसे सत्ता की ठसक कहें या फिर चार चरणों के चुनाव के बाद हार की किसी आशंका में मोदी ये भी भूल गए कि राजनीति लोकलाज से चलने वाली चीज़ है. जिस अटल बिहारी वाजपेयी की नरेंद्र मोदी को पहली बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका रही, उन्हीं अटल बिहारी वाजपेयी की जानलेवा बीमारी का इलाज राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए कराया था, जिसकी भनक तक उन्होंने किसी दूसरे को लगने नहीं दी थी.
इस बात का खुलासा राजीव गांधी की मौत के बाद खुद अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था कि वे राजीव गांधी की बदौलत ही जीवित हैं. और तो और मोदी जिस हिंदुत्व की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं, उस धर्म में भी उन लोगों के प्रति शालीनता बरतने की परंपरा रही है जो जीवित नहीं हो.
बहरहाल, नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी पर जिस तरह से निशाना साधा है, उससे प्रियंका गांधी के इस आरोप में दम दिखता है कि मोदी जी के दिमाग़ में उनके परिवार के प्रति एक तरह की सनक है. प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया है, शहीदों के नाम पर वोट मांगकर उनकी शहादत को अपमानित करने वाले प्रधानमंत्री ने कल अपनी बेलगाम सनक में एक नेक और पाक इंसान की शहादत का निरादर किया.
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वहीं मोदी के बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिस तरह से रिएक्ट किया है, उसकी भी तारीफ़ हो रही है. राहुल गांधी ने ट्वीट किया है, "मोदी जी, युद्ध समाप्त हो चुका है. आपके कर्म आपका इंतज़ार कर रहे हैं. खुद को लेकर अपनी सोच को मेरे पिता पर डालने से आप बच नहीं पाएंगे. प्यार और जोरदार झप्पी. राहुल."
लेकिन यह सब बातों का ख्याल नरेंद्र मोदी क्यों करेंगे. जब वो राजीव गांधी को निशाना बना रहे थे तो उन्हें संभवत यह बात भी याद नहीं रही कि उनके अपनी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण ऑन कैमरा रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे. पार्टी के एक और नामचीन नेता दिलीप सिंह जूदेव ऑन कैमरा कहते हुए पकड़े गए थे- पैसा खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम भी नहीं.
हालाँकि नरेंद्र मोदी के भाषणों में तथ्यों के साथ हेरफेर और व्यक्तिगत हमले करना कोई नहीं बात नहीं है. वे किसी को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड बता सकते हैं, कभी विपक्ष की सभी नेताओं को जेल भेजने की धमकी दे सकते हैं. बावजूद इन सबके उनके ताजा बयान से दो ही बात जाहिर हो रही है.
पर इसे सत्ता की ठसक कहें या फिर चार चरणों के चुनाव के बाद हार की किसी आशंका में मोदी ये भी भूल गए कि राजनीति लोकलाज से चलने वाली चीज़ है. जिस अटल बिहारी वाजपेयी की नरेंद्र मोदी को पहली बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका रही, उन्हीं अटल बिहारी वाजपेयी की जानलेवा बीमारी का इलाज राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए कराया था, जिसकी भनक तक उन्होंने किसी दूसरे को लगने नहीं दी थी.
इस बात का खुलासा राजीव गांधी की मौत के बाद खुद अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था कि वे राजीव गांधी की बदौलत ही जीवित हैं. और तो और मोदी जिस हिंदुत्व की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं, उस धर्म में भी उन लोगों के प्रति शालीनता बरतने की परंपरा रही है जो जीवित नहीं हो.
बहरहाल, नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी पर जिस तरह से निशाना साधा है, उससे प्रियंका गांधी के इस आरोप में दम दिखता है कि मोदी जी के दिमाग़ में उनके परिवार के प्रति एक तरह की सनक है. प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया है, शहीदों के नाम पर वोट मांगकर उनकी शहादत को अपमानित करने वाले प्रधानमंत्री ने कल अपनी बेलगाम सनक में एक नेक और पाक इंसान की शहादत का निरादर किया.
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वहीं मोदी के बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिस तरह से रिएक्ट किया है, उसकी भी तारीफ़ हो रही है. राहुल गांधी ने ट्वीट किया है, "मोदी जी, युद्ध समाप्त हो चुका है. आपके कर्म आपका इंतज़ार कर रहे हैं. खुद को लेकर अपनी सोच को मेरे पिता पर डालने से आप बच नहीं पाएंगे. प्यार और जोरदार झप्पी. राहुल."
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