Thursday, November 29, 2018

السجن 10 سنوات لآسيوي يتاجر في «الهيروين» بالقضيبية

حكمت المحكمة الكبرى الجنائية الأولى بالسجن 10 سنوات على آسيوي متهم بتقديم مخدر الهيروين بمقابل لمصدر سري، وغرمته المحكمة 3 آلاف دينار وأمرت بإبعاده عن البلاد نهائيا بعد تنفيذ العقوبة.
وكانت الجهات المعنية تلقت بلاغا يفيد بأن شخصا آسيوي الجنسية يقوم بترويج الهيروين ويقدمه بمقابل للتعاطي، ومن خلال أحد المصادر السرية تم التواصل معه وطلب منه المصدر شراء كمية من الهيروين بمبلغ 40 دينارا، فوافق المشتبه به وأبلغه بأنه سيكون موجودا بالقرب من أحد الفنادق بمنطقة القضيبية بالمنامة، وفي الموعد المتفق عليه وصل المصدر السري واتصل بالمتهم، فأبلغه الأخير بأنه سوف يرسل له شخصا يقوم بإعطائه الهيروين وزوده برقم هاتفه، فتواصل معه المصدر السري وحضر المتهم وأعطاه اللفافة واستلم منه المبلغ المصور.وبعد عملية التسليم والتسلم أعطى المصدر السري الإشارة للقوة التي كانت تراقب العملية، فقاموا بضبط المتهم وعثر معه على المبلغ المصور، وبتفتيش مسكنه
لم تشفع إعاقة بحريني من ذوي الهمم له عندما أراد شاب أن يختاره ليكون ضحية سرقته على الرغم من أن حصيلة السرقة ليست إلا تلفونا نقالا، ولكن الواقعة كشفت عن دناءة الفاعل الذي استغل عدم قدرة المجني عليه على المقاومة وقام برفقة آخرين بسرقة الهاتف النقال بكل سهولة، إلا أن تتبع الرقم السري للهاتف ساهم في القبض عليه فقضت المحكمة الجنائية الصغرى الثالثة بحبسه مدة سنة.
وكانت النيابة أسندت الى المتهم أنه في 12/3/2018 بدائرة أمن محافظة الشمالية سرق المتهم وآخرين مجهولين الهاتف النقال المبين الوصف والنوع بالمحضر والمملوك للمجني عليه، وذلك بعد بلاغ من زوجة المجني للجهات المعنية تفيد بأنها في يوم الواقعة تركت زوجها المجني عليه جالسا تحت البناية السكنية وقامت هي بتوصيل الأبناء الى المدرسة وعند رجوعها أخبرها زوجها أن إحدى السيارات بها ثلاثة أشخاص توقفوا أمامه وقاموا بالتحدث معه وسرقوا هاتفه النقال.
وبناء على قرار النيابة العامة حول الاستعلام عن مستخدم الجهاز المسروق وردت بيانات مستخدم الهاتف المسروق من قبل الإدارة العامة للمباحث وتم استدعاؤه الى مركز الشرطة وتبين انه قام بشراء الهاتف من محل هواتف وعند التواصل مع صاحب المحل اتضح أن الشخص الذي قام ببيع الهاتف للمحل هو (المتهم) وتم إرفاق فاتورة البيع وبها نسخة من جواز سفر المتهم، وعليه تم عرض صورة المتهم على المجني عليه وزوجته فاعترف عليه بأنه ذات الشخص الذي قام بسرقة هاتفه.
وحيث إنه من المقرر قانونا وفق نص المادة 373 عقوبات أن السرقة تقع باختلاس مال منقول مملوك للغير بنيّة تملكه والاختلاس في جريمة السرقة يتم بانتزاع المال من حيازة صاحبه بغير رضاه والمال المنقول هو كل ما له قيمة مالية ويمكن تملكه وحيازته، ويتوافر القصد الجنائي وقت ارتكاب الفعل بقيام العلم عند الجاني وقت ارتكابه الفعل بـأنه يختلس المنقول المملوك للغير من غير رضا مالكه بنية تملكه، فلهذه الأسـباب حكمت المحكمة بحبس المتهم سنة مع النفاذ عما نسب إليه من اتهام. 
ونفى المتهم في تحقيقات النيابة تهمة تقديم المخدر بمقابل وقال إنه يتعاطى منذ فترة، وفي يوم الواقعة خرج لشراء السحور، فتم القبض علي. أسندت له النيابة العامة أنه في 16/5/2018 بدائرة أمن محافظة العاصمة، قدم بمقابل مادة مخدرة «هيروين» للتعاطي في غير الأحوال المرخص بها، وكان ذلك بمقابل، وحاز وأحرز بقصد التعاطي مادة المورفين المخدرة.
قضت المحكمة الجنائية الصغرى الثالثة بحبس صاحب عمل بحريني 10 أيام بسبب رفضه تسليم عامل آسيوي لجواز سفره وأصر على الامتناع، وقضت المحكمة باستبدال العقوبة بتسليم جواز السفر للمجني عليه
وأسندت النيابة للمتهم أنه في غضون عام 2018 بدائرة امن محافظة الشمالية أختلس المال المنقول المبين الوصف بالمحضر والمملوك للمجني عليه إضرار بصاحب الحق عليها والمسلمة إليه على سبيل الوديعة وذلك على النحو المبين بالأوراق.
وتعود تفاصيل الواقعة إلى تلقى الجهات الأمنية بلاغا من آسيوي يتهم كفيله باختلاس جواز سفره والمسلم إليه على سبيل الوديعة مشيرا إلى أن كفيله قام بأخذ سفار سفره منذ حوالي عامين وعندما توجه إليه لكي يطلب جواز سفر رفض إعطائه إياه، فقامت الشرطة بالاتصال بالمتهم وتم إخباره عن الجواز إلا أنه قرر بأنه يرفض تسليم المجني عليه الجواز.
وقالت المحكمة أن جواز السفر هو الوثيقة الرسمية التي تعارف عليها المجتمع الدولي لإثبات شخصية صاحبه في السماح له بالتنقل من دولة إلى أخرى وكانت حرية الانسان في الاقامة أو التنقل من الحقوق العامة التي يكفلها دستور الدولة لمواطنيها وهو مقرر وفقاً للأحكام السائدة في فقه القانون الدولي للأجنبي المقيم في إقليم الدولة وفقاً للشروط المقررة في قانونها الداخلي فيعتبر جواز السفر وثيقة شخصية لصاحبه وطنياً أو أجنبياً لا يحق لغيره الاستيلاء عليه او احتجازه كما لا يجوز للسلطات الادارية في الدولة احتجازه لديها بما يحول دون ممارسة صاحبه حقه في السفر إلا بقرار من السلطة التي تملكه في بلده وفقاً لأحكام القانون .  
فلهذه الأســـباب حكمت المحكمة بحبس المتهم لمدة عشرة ايام لما نسب إليه من اتهام ويستبدل بها بإلزام المحكوم عليه بتسليم جواز سفر المجني عليه على إليه من تاريخ صدور هذا الحكم وذلك جبراً للضرر الناشئ عن الجريمة.

Monday, November 12, 2018

छठ पर बस वालों की मनमानी: 6 हजार किराया देकर 1 सीट पर जा रहे 6 लोग

महापर्व छठ की शुरुआत हो चुकी है लेकिन छठ के नाम पर उन लोगों से लूट का बाजार भी फल फूल रहा है जो इस मौके पर अपने घर जाने की कोशिश में हैं. रेल में सीट नहीं है और बस में जाने की मजबूरी है. इसी मजबूरी का फायदा उठा कर बस ऑपरेटर तिगुना किराया वसूल रहे हैं. 'आज तक' की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम ने अपने खुफिया कैमरे में बस ऑपरेटरों की मनमानी को कैद किया है.
दिल्ली से बिहार जाने को तैयार साहिल ट्रैवल्स की एक बस में एक डबल स्लीपर में जहां दो लोगों के सोने की जगह है, वहां 4 लोगों को 20-22 घंटे के सफर के लिए ठूसा गया. बस के क्यूबिकल स्लीपर किसी पिंजरे से कम नहीं.
मां सरस्वती टूर एंड ट्रेवल्स के बस ऑपरेटर राजीव शर्मा ने किराया के बारे में बताया, 'रेट कई तरह के चल रहे हैं. जैसे स्लीपर होता है दो आदमी के लिए. अगर आप पूरा स्लीपर लोगे तो एक बंदे का तीन हजार रुपया पड़ेगा. दो आदमी उसमें आ जाएंगे. अपना शटर डाउन करो और आराम से सोते हुए जाओ.'
रिपोर्टर ने राजीव शर्मा से पूछा, क्या एक स्लीपर के छह हजार देने पड़ेंगे. इस पर राजीव शर्मा ने कहा, 'हां छह हजार रुपए देने होंगे. उसकी दूसरी कंडिशन ये है कि अगर तीन बंदे जाओगे तो उसमें आपके 2200-2200 रुपए लगेंगे. उसमें तीन चले जाएंगे. और अगर आप चार बंदे जाओगे तो उसमें 1800 रुपए लगेंगे.
'आज तक' के रिपोर्टर ने ऑपरेटर से पूछा, 4 कहां जा सकते हैं उसमें. इस पर राजीव शर्मा ने कहा, जा रहे हैं. पूरे चार-चार जा रहे हैं लेकिन मैं तो कंडिशन बता रहा हूं. मैं ये नहीं कह रहा कि आप जाओ. छठ के नाम पर बस ऑपरेटरों की मनमानी का सच ये है कि रेट कार्ड में दोगुने से ज्यादा का इजाफा और वो भी सफर मुश्किलों से भरा. छठ से पहले इन बसों में एक सीट का किराया एक हजार से 1500 तक का था लेकिन अब लूट खुलेआम है.
एक और बस ऑपरेटर गोबिंद कुमार से बात हुई. उसने स्लीपर में 4 आदमी जाने की बात कही और एक आदमी का 1600 रुपए किराया बताया. इतना ही नहीं, नीचे बैठने के 2000 रुपए किराया है. सिर्फ सीट और स्लीपर ही नहीं, बस के हर कोने में, पायदान पर और पैसेज में बैठने की भी कीमत हजारों में वसूली जा रही है. 'आज तक' की स्पेशल इंवेस्टिगेटिव टीम ने पवन ट्रेवल्स की भी पड़ताल की. बस ऑपरेटर अंकित बंसल ने बताया कि कोने में बैठने के भी 1600 रुपए लिए जा रहे हैं.
आनंद विहार से पटना, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और बिहार के दूसरे हिस्से में जाने वाली कई बसों में दिखा कि कैसे सवारियों को ठूंसा जा रहा है. जिन बसों की क्षमता 50 लोगों की है, उनमें 100 लोगों को भरा जा रहा है. कीमत भी 1000 के बदले 2600 तक लिए जा रहे हैं. खुलेआम बस ऑपरेटर अपना रेट कार्ड दिखा रहे हैं. त्रिशक्ति टूर एंड ट्रैवल्स के बस ऑपरेटर माही सैफी ने भी अपनी बसों में स्लीपर के लिए 1800 रुपए से लेकर 3200 रुपए तक किराया बताया. सैफी के मुताबिक, छठ के बाद लोग जाएंगे तो किराया कम है. छठ की वजह से अभी रेट बढ़ा हुआ है.
सरकारी बदइंतजामी की वजह से लोग खुलेआम लूटे जा रहे हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि इस लूट और बदइंतजामी पर सरकार क्यों खामोश है क्योंकि जिनका काम है नियम और कानून को लागू करना वो अपनी आंखें मूंदने की कीमत वसूल रहे हैं.
माही सैफी ने बताया, 'मंथली जाता है, डेली भी जाता है. अलग-अलग होता है हर किसी का. 5 नंबर वाले अलग होते हैं, तीन नंबर वाले अलग होते हैं. ट्रैफिक अलग होती है, पुलिस अलग होती है. बहुत खर्चे हैं क्या-क्या बताया जाए. बस ऑपरेटर अपनी मजबूरी बताकर लूट मचा रहे हैं लेकिन असल मुश्किल तो सवारियों की है. सवारियों ने बताया कि एक स्लीपर में चार से छह लोग जा रहे हैं.

Wednesday, October 10, 2018

होंडा ने नये कलेवर में पेश की अपनी दमदार SUV

यह नयी कार 28.15 लाख से 32.75 लाख रुपये (शो रूम कीमत) के बीच उपलब्ध है. सीआर-वी के पांचवें संस्करण की पेट्रोल से चलने वाली कार की कीमत कंपनी ने 28.15 लाख रुपये तय की है.
वहीं, डीजल संस्करण की कीमत 30.65 लाख रुपये एवं ऑल व्हील ड्राइव (एडब्ल्यूडी) वाहन का मूल्य 32.75 लाख रुपये है. होंडा ने पहली बार सीआरवी मॉडल का वाहन डीजल इंजन के साथ भारतीय बाजार में उतारा है.
होंडा कार इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ गाकू नाकानिशी ने संवाददाताओं से कहा वर्तमान वित्त वर्ष में कंपनी की योजना तीन और नये उत्पाद पेश करने पर है.में जीता नयी दिल्ली : दुनिया की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी इथियोपिया की अलमाज अयाना ने पहली बार दिल्ली हाफ मैराथन में भाग लेते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि उनके हमवतन बेरहानू लेगेसे ने पुरुषों के वर्ग में खिताब जीता. लंबी दूरी में दुनिया की शीर्ष धाविका अयाना ने एक घंटे सात मिनट और 11 सेकंड में रेस जीती. थियोपिया ने तीनों शीर्ष स्थानों पर कब्जा किया. अबादेल येशानेह और नेतसानेत गुदेता क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे. उन्होंने 21.097 किलोमीटर की दूरी क्रमश: एक घंटे सात मिनट और 19 सेकंड और एक घंटे सात मिनट 24 सेकंड में पूरी की. पुरुषों की एलीट रेस में 2015 के विजेता लेगेसे ने 59 मिनट 46 सेकंड में रेस पूरी करके खिताब जीता.
इथियोपिया के अनाडामलाक बेलिहू 59.51 मिनट का समय निकालकर दूसरे स्थान पर रहे. वहीं अमेरिका के लियोनार्ड कोरिर तीसरे स्थान पर रहे जिन्होंने 59.52 मिनट का समय निकाला. महिला और पुरुष दोनों विजेताओं को 27000 डालर मिले. अयाना और लेगेसे हालांकि कोर्स का 1:06:54 और 59:06 मिनट का रिकार्ड नहीं तोड सके.
भारतीय महिलाओं में एल सूरिया ने कोर्स रिकार्ड : भारतीयों का : तोड़कर 1:10:31 की टादमिंग के साथ स्वर्ण पदक जीता. लंबी दूरी की धाविका सुधा सिंह (1:11:30) और पारुल चौधरी (1:13:09 ) क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रही. ओलंपियन नितेंद्र सिंह रावत ने भारतीय पुरुषों की रेस जीती जिन्होंने 1:03:53 का समय निकालकर कोर्स का नया रिकार्ड बनाया. नाटकीय फोटो फिनिश में जी लक्ष्मणन ने भी यही समय निकाला लेकिन दशमलव के बाद की गणना के आधार पर वह दूसरे स्थान पर रहे.
महाराष्ट्र के 21 बरस के अविनाश साबले तीसरे स्थान पर रहे जिन्होंने अपनी पहली हाफ मैराथन में ही पदक जीता. वह फोटो फिनिश में तीसरे स्थान पर रहे चूंकि दुर्गा बहादुर बुद्धा को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा.
रेस के 13वें सत्र में भाग लेने करीब 35000 रनर दिल्ली की सड़कों पर उतरे. दिल्ली में स्माग के कारण भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने इसे पहले रद्द कर दिया था जिससे हाफ मैराथन विवादों से घिर गई थी. रेस आयोजकों प्रोकैम इंटरनेशनल के अनुसार पिछली बार इसमें 34000 लोगों ने और 2015 में 30000 लोगों ने भाग लिया था.
सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर रेस शुरु हुई और तापमान 15 डिग्री तक गिरने के बावजूद लोगों ने बढ़ चढ़कर इसमें भाग लिया. कल सुबह बारिश के कारण प्रदूषण का स्तर कम हुआ था. करीब 35000 प्रतियोगियों में से 13216 ने हाफ मैराथन में भाग लिया जबकि बाकियों न ग्रेट दिल्ली रन, 10के रन , सीनियर सिटीजंस रन और चैम्पियंस विद डिसएबिलिटी रन में हिस्सा लिया.

Friday, September 28, 2018

सलमान के साथ काम करने में आपत्ति नहीं: सनी देओल

बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल का कहना है कि उन्हें सलमान खान के साथ काम करने में कोई आपत्ति नही है। सनी देओल ने सलमान खान के साथ नब्बे के दशक में सुपरहिट फिल्म जीत में काम किया था। इसके बाद से यह जोड़ी सिल्वर स्क्रीन पर साथ नजर नहीं आयी। सनी से जब यह पूछा गया कि क्या वे सलमान खान के साथ फिल्म करना पसंद करेंगे, उन्हाेंने कहा , “मुझे नहीं लगता कि कोई निर्माता या निर्देशक हम दोनों को एक ही फिल्म में साइन करेगा। यदि करता भी है तो हम दोनों के रोल के साथ न्याय नहीं कर पाएगा। यदि कोई स्क्रिप्ट मुझे पसंद आएगी तब मैं उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं। मुझे किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं है।”लीवुड अभिनेत्री दिशा पटानी का कहना है कि वह एक्टिंग के मामले में खुद को जज नहीं कर सकती है। दिशा ने वर्ष  में प्रदर्शित तेलुगू फिल्म ‘लोफर’ के जरिये एक्टिंग करियर की शुरूआत की थी। इसके बाद उन्हाेंने वर्ष  में प्रदर्शित फिल्म ‘एम.एस धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी’ ‘कुंग फू योगा’ और ‘बागी 2’ में काम किया। दिशा इन दिनों सलमान खान के साथ फिल्म भारत में काम कर रही है। दिशा से उनके अब तक के कैरियर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा , “मैं एक्टिंग के मामले में खुद को जज नहीं कर सकती। मैं बहुत शर्मीले स्वभाव की हूं। मैंने कभी अपनी फिल्में नहीं देखी इसलिए मुझे नहीं पता लेकिन यकीनन मैं फिल्म निर्माण के इस पूरे परिवेश में सहज हो रही हूँ।”बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर ने तनुश्री दत्ता के उन पर लगाये आरोपों को नकारते हुए कहा है कि वह उन पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। पूर्व मिस इंडिया और अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर वर्ष 2009 में ‘हॉर्न ओके प्लीज’ के सेट पर उनसे बदतमीजी करने का आरोप लगाया था। नाना ने तनुश्री के सारे आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं क्या कह सकता हूं कि वह ऐसा क्यों कह रही हैं? मैं कैसे जान सकता हूं कि वह ये सब क्यों बोल रही हैं? यौन शोषण से उनका क्या मतलब है? सेट पर मेरे साथ 50 से 100 लोग रहते थे।” नाना ने कहा, “ मैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा लेकिन यह सब मीडिया को बताने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि आप तो कुछ भी चलाएंगे। जिसे जो कहना है कहता रहे, मैं अपना काम करता रहूंगा।” उल्लेखनीय है कि तनुश्री ने नाना पर आरोप लगाते हुये कहा था कि नाना का औरतों से छेड़छाड़ का इतिहास रहा है। इंडस्ट्री में सभी को पता है कि वह औरतों के साथ बदतमीजी करते हैं। उन्होंने नाना पर ऐक्ट्रेसेज पर हाथ उठाने का भी आरोप लगाया।की सबसे बड़ी पार्टियों में से एक, भाजपा में बड़े बदलाव की बयार चल पड़ी है। यह इसके पितृ अथवा मूल संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अपने रणनीतिक उद्देश्यों तथा सिद्धांतों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव है। केशव बलिराम हेडगवार द्वारा 27 सितंबर 1925 को नागपुर में स्थापित आरएसएस मूलतः एक सामाजिक संगठन है जो कि इसलिए विशेष रूप से जाना जाता है क्योंकि इसका उद्देश्य हिंदू हितों को संरक्षित करना रहा है। अन्य धर्मों, विशेषकर इस्लाम की ओर से हो रहे आक्रमणों से हिंदू हितों की रक्षा करना इसका मूल उद्देश्य रहा है। इस संगठन में शुरू से ही मुस्लिम व ईसाई सदस्य रहे हैं, इसके बावजूद यह हिंदू समर्थक संगठन बना रहा। यह नरेंद्र मोदी हैं जो वर्ष 2014 के चुनाव से पहले इसे ज्यादा उदारवादी बनाते हुए इसकी विचारधारा में बदलाव लेकर आए। उन्होंने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया जिससे यह प्रतिस्थापित हो गया कि राजनीतिक पार्टी भाजपा धर्म अथवा जाति का भेदभाव किए बिना सभी के लिए काम करेगी। यह एक बड़ी भूमिका वाली पुनः परिभाषा थी जो मोदी द्वारा की गई तथा कुछ लोगों ने इसे दिशा सहीकरण बताया। अब तक उपलब्ध साहित्य व नेताओं द्वारा दिए गए संबोधनों का सार यह रहा है कि पार्टी हिंदू समर्थक संगठन है तथा बहुसंख्यक समुदाय के हितों को संरक्षित करती रहेगी। वास्तव में यह प्रक्रिया अति सूक्ष्म रूप से अटल बिहारी वाजपेयी के काल में ही शुरू हो गई थी। वह ऐसे व्यक्ति थे जो अपने दृष्टिकोण में उदारवादी तथा व्यापक हितधारक थे। इसलिए उन्होंने पार्टी की कार्यशैली में खुलेपन का अंदाज लाया जिससे न्यायसंगत मानव चिंताओं को इसमें स्थान मिला। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हिंदुत्व के अपने मूल मार्ग पर चलता रहा। कई बार यह भय भी अभिव्यक्त हुआ कि आरएसएस वाजपेयी शैली का उदारवाद अस्वीकृत भी कर सकता है।
नरेंद्र मोदी ने इस प्रक्रिया को और विस्तार देते हुए एक नई नीति की परिपाटी स्थापित की कि हम संविधान की भावना के अनुकूल हिंदू और मुसलमानों के साथ समान व्यवहार करेंगे ताकि संविधान में परिकल्पित समानता तथा न्याय को प्राप्त किया जा सके। किंतु इसने मुसलमानों से अधिमान्य समूह की भावना को छीन लिया। कांग्रेस के राज में यह भावना मुसलमानों की मत-शक्ति के कारण उत्पन्न हुई थी न कि छद्म पंथनिरपेक्षता के कारण जैसी कि उन्होंने परिकल्पित की। सभी दलों के लिए अल्पसंख्यकों के वोट का महत्त्व बहुत अधिक है क्योंकि वे एक सेगमेंट के रूप में अपने निर्णय सामूहिक रूप से करते हैं। बहुसंख्यक समुदाय का इस लिहाज से कोई महत्त्व नहीं है क्योंकि वे जातीय आधार पर बंटे हुए हैं। परिणामस्वरूप होने यह लगा कि जो पार्टी इस समुदाय के सबसे अधिक अनुकूल लगती थी, उसी के पक्ष में इस समुदाय का झुकाव हो जाता था। वे अब तक विशिष्ट स्थिति का लाभ उठा रहे थे, किंतु हाल के दिनों में उन्हें चुनौती उभरती दिखाई दी।
विशेषाधिकार के लिए संघर्ष कानून के अंतर्गत अनुरक्षणीय नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस वक्तव्य का अकसर उद्वरण दिया जाता है कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इस वक्तव्य को तुष्टिकरण के रूप में देखा जाता रहा है। सवाल यह है कि जब संविधान पक्षपात व अधिमान्य व्यवहार की अनुमति देता ही नहीं तो क्यों किसी का पहला अधिकार होना चाहिए। मनमोहन सिंह जैसे विशुद्ध अर्थशास्त्री के प्रधानमंत्री पद पर होते हुए उन्हें क्या जरूरत थी कि वह इस तरह का वक्तव्य देते जिसकी पैरवी करना बहुत मुश्किल है। लेकिन धर्म व जाति के आधार पर वोट पाने की परिपाटी जारी रही। मैं समझता हूं कि संवैधानिक रूप से स्वीकृत बिना पक्षपात के समानता व न्याय वाला दृष्टिकोण जिसे मोदी ने प्रतिस्थापित किया है, यही आरएसएस में प्रचलित था जो कि मोहन भागवत द्वारा परिकल्पित किए गए बदलावों से जाहिर है। भाजपा व आरएसएस दोनों एक ही दिशा में चल रहे लगते हैं तथा इस पर विरोधियों द्वारा अकसर सवाल उठाए जाते रहे हैं। यह बात वास्तव में मूल हिंदू दृष्टिकोण में है जो कि इसके धर्मग्रंथ में प्रतिपादित है जिसमें सभी के सुखी व स्वस्थ होने की कामना की जाती है, भले ही वह उस धर्म का अनुयायी न ही हो। स्वामी विवेकानंद इस विचार का प्रतिपादन करने वाले शायद पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हमारी धरोहर की अंतर-लहर को महसूस किया। वास्तव में हमारा मूल धर्म वैदिक है जिसमें बाद में पुजारियों के स्वार्थ के कारण कुछ रीति-नीति व अंधविश्वास आ गए जिन्होंने मूल धर्म को हानि पहुंचाने का काम किया। बहुत बाद में भारत पर हमला करने वाले विदेशी आक्रांताओं के हिंसक कार्यों व अत्याचारों से ये मिक्स हो गईं। जैसा कि हम अपने मंदिरों को भूल गए थे और उन पर धूल जम गई थी, मूल धर्म को फिर से प्रतिस्थापित करने का समय आ गया है। भारत इस तरह के जघन्य इतिहास से भी गुजर चुका है कि लोग यही भूल गए थे कि गौतम बुद्ध का जन्म कहां पर हुआ था।
यह बहुत बाद में हुआ कि जापानी तीर्थ यात्री गया में इन मंदिरों के भ्रमण को आए तथा इस महान घटनाक्रम को लुंबिनी से जोड़ते हुए धूल की परतें हटाई गईं। भारत के भविष्य पर जो तीन दिन का सम्मेलन हुआ, उसमें आरएसएस ने अपना नया चेहरा प्रोजेक्ट किया है, यह इसका नया अवतार हो सकता है। लेकिन जब भविष्य की बात हो रही हो तो मसले को इतिहास के झरोखे में छिपाया नहीं जा सकता। भावी संबंधों में भाजपा का क्या प्रतिरूप होगा तथा उसकी भावी संभावनाएं क्या हैं, इस संबंध में एक पूरी कहानी बताने की जरूरत है। आने वाले दिनों में इन विषयों पर भी व्यापक विचार-विमर्श होता रहेगा तथा मैं फिर से विस्तृत समीक्षा पेश करूंगा।

Friday, September 14, 2018

नज़रियाः क्या तेजस्वी और तेज प्रताप के रास्ते अलग हो रहे हैं?

लालू यादव के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आधिकारिक निवास पर 11 सितंबर को हुई पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में उनके बड़े बेटे तेज प्रताप की अनुपस्थिति ने अटकलों के बाज़ार को गरम कर दिया है.
दिलचस्प तो यह है कि तेज प्रताप उसी बंगले में थे लेकिन बैठक में नहीं आए.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान उन्होंने खुद को एक कमरे के भीतर बंद कर रखा था.
यह बैठक अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी और इसकी अध्यक्षता बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और तेज के छोटे भाई तेजस्वी यादव कर रहे थे.
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी सांसद बेटी मीसा भारती भी इस बैठक में मौजूद थीं.पोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के महागठबंधन के बाद जब तेजस्वी ने 20 नवंबर 2015 को उपमुख्यमंत्री का पद संभाला तो उनके शपथ लेने से पहले भी तेज ने हंगामा खड़ा कर दिया था.
आखिर उन्हें उनके माता-पिता ने स्वास्थ्य मंत्रालय संभालने के लिए राजी कर लिया.
लेकिन पिछले 22 महीनों के दौरान आरजेडी की अंदरुणी राजनीति में बहुत कुछ हुआ है.
तेज प्रताप की अब शादी हो चुकी है. मीडिया रिपोर्टों मुताबिक पहले उन्हें अपनी मां का समर्थन प्राप्त था लेकिन अब मामला बदल गया है.
अब वो अलग-थलग पड़ गए हैं, जिसके सबूत 11 सितंबर को हुई पार्टी की यह बैठक खुद ही है.
यहां तक कि कुछ समय पहले तेज़ प्रताप ने अपनी एक फ़ेसबुक पोस्ट में भी यह शिकायत की थी कि अब उनकी मां भी नहीं सुनती हैं. बाद में उन्होंने इस बात से इंकार कर दिया कि उन्होंने ऐसा कुछ लिखा था और इस पोस्ट के लिए दूसरों पर आरोप मढ़ दिया.
आरजेडी के मुखिया के परिवार को निश्चित ही उनके बर्ताव की वजह से कइयों बार शर्मिंदा होना पड़ा है, लेकिन पार्टी के दिग्गज इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि वो संकट के इस दौर पर काबू पा लेंगे और बड़े बेटे को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया जाएगा.
पार्टी के एक बड़े नेता ने अपना नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर इस स्थिति की तुलना डीएमके पार्टी से किया, जहां पिता करुणानिधि ने छोटे भाई स्टालिन को अपना सियासी वारिस बना दिया और बड़े भाई अलागिरी को पार्टी के बाहर कर दिया था.
वो लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के उस फ़ैसले का उदाहरण देते हैं कि किस तरह से आरजेडी सुप्रीमो ने परेशानी का सबब बने अपने सालों साधु यादव और सुभाष यादव से पार पाया था.
वास्तव में, खुद पार्टी के भीतर यह आम राय थी कि उन दोनों ने पार्टी को फ़ायदा पहुंचाने की जगह ज़्यादा नुकसान पहुंचाया था.लांकि, इसे देखते हुए कि भारतीय जनता पार्टी आरजेडी की किसी भी चूक का फ़ायदा उठाने के लिए तैयार है, बड़े बेटे की चुनौती पर काबू पाना उतना मुश्किल नहीं होगा.
वैसे ये बता दें कि बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे, जिन्होंने 2013 में उनसे मिलने गांधीनगर पहुंचे साधु यादव का तब अपने घर पर स्वागत किया था.
भारतीय जनता पार्टी हमेशा ही तेज प्रताप को लेकर नरम रही है. बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की तरफ से 12 सितंबर को हुई उस बैठक पर जल्द ही प्रतिक्रिया भी आ गई जिसमें उन्होंने अगले चुनाव में आरजेडी के विघटन और महागठबंधन के हार की भविष्यवाणी की.
इस सब के बीच यह एक बेहद दिलचस्प पहलू है कि राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा और हेमा (लालू-राबड़ी की एक और बेटी) पर सुशील मोदी पहले भी आरोप लगाते रहे हैं लेकिन तेज प्रताप के ख़िलाफ़ उन्होंने कभी भी कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं मढ़े.
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का यह मानना है कि केंद्रीय एजेंसियों का किसी भी जांच से तेज प्रताप को बाहर रखना इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि आरजेडी सुप्रीमो के परिवार के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे इस पूरे अभियान के राजनीतिक मायने भी हैं.
एक आम राय है कि "यदि परिवार में हर कोई भ्रष्ट है तो तेज प्रताप भला कैसे साफ़ हो सकते हैं."
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती में भाग लेने के लिए 5 जनवरी, 2017 को पटना गए थे तब उन्होंने कृष्ण की अराधना के लिए तेज प्रताप की प्रशंसा करने के लिए समय निकाला था.
संयोग से, भाजपा और उसकी सहयोगी जेडीयू की चुप रहने और तेज़ की आलोचना से बचने की रणनीति तब भी जारी रही जब तेज ने सार्वजनिक रूप से एनडीए नेताओं की आलोचना की. एक बार उन्होंने यह भी कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खाल उधड़वा देंगे.
हालांकि भगवा पार्टी के नेताओं ने इसकी आलोचना की लेकिन उनकी प्रतिक्रिया उतनी तीखी नहीं थी. बिहार की राजनीतिक गतिविधियों पर नज़र रखने वालों के अनुसार भाजपा भविष्य में तेज के साथ संबंधों का फायदा उठाएगी.
कुछ निष्पक्ष विश्लेषकों का मानना है कि आरजेडी या महागठबंधन को बाहर यानी एनडीए से कोई ख़ास ख़तरा नहीं है, बल्कि समस्याएं तो पार्टी के भीतर से ही हो सकती है.
लेकिन आरजेडी नेताओं को भरोसा है कि वो इस चुनौती से उबर जाएंगे. वास्तव में परिवार के सभी सदस्यों ने तेज के कार्यक्रमों से खुद को अगल करना शुरू कर दिया है.
तेज के साथ समस्या यह है कि उनका आरजेडी के पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या से शादी हुई है.

Tuesday, September 4, 2018

रज-पर्व: जब 3 दिनों के लिए धरती को पीरियड्स आते हैं


ओडिशा का सबसे बड़ा त्यौहार रज-पर्व चल रहा है. आज उसका तीसरा और आखिरी दिन है. ओडिशा के लोग मानते हैं कि इस दौरान पृथ्वी के पीरियड्स आते हैं. ये त्यौहार औरत होने की फीलिंग को सेलिब्रेट करता है.
ओडिशा का छोटा सा गांव, बालेश्वर. वहां के लोग ‘बालासोर’ कहते हैं. मैंने उस शहर में दो साल बिताए हैं. ऐसे सुनने में तो दो साल मतलब कुछ भी नहीं लगता. लेकिन वो दो साल मेरी ज़िन्दगी के बहुत बड़े टर्निंग पॉइंट रहे हैं.
खैर, ओडिशा की हवा में बहुत अपनापन है. बहुत सादगी है. ताज़ी हवा है. लोग आराम की ज़िन्दगी जीते हैं.
जैसी हमारे गांव में सर्दी की दोपहर होती है, गर्मियों की शामें होती हैं. वैसी आराम की ज़िन्दगी बालासोर में मुझे हर रोज़ दिखती थी. कोई जल्दीबाज़ी नहीं. कोई बेमतलब की हड़बड़ी नहीं. चैन से जीते हैं. छककर डालमा, पोखाड़, माछ और साग खाते हैं. दोपहर में भी 3-4 घंटे सोते हैं. पंखे से मक्खी-मच्छर उड़ाते रहते हैं. औरतें पल्ला निचोड़ कर पसीना सुखाती हैं. बड़े से भगोने में घर-भर के लिए नीम्बू-पानी बनता है. गोले में बैठकर एक-एक घूंट सब पीते हैं और भगोना आगे बढ़ाते जाते हैं.
बहुत सी यादें हैं. लेकिन सबसे खूबसूरत जो याद है वहां की. वो है ओडिशा के सबसे खूबसूरत त्यौहार की. रज-पर्व.
जब पता चला था, मुझे आश्चर्य हुआ था. बड़े शहरों में मॉडर्न होने के नाम पर बहुत बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं. पर पीरियड्स आज भी एक टैबू बना हुआ है. लेकिन आज भी पीरियड्स के दौरान लड़कियों को मंदिर में जाना सख्त मना होता है. सबरीमाला मंदिर ने तो कुछ महीने पहले नोटिस भी जारी कर दिया था. 10 से 50 साल तक की औरतें पीरियड्स के दौरान मंदिर में घुस ही नहीं सकतीं. मेरी भी हमेशा इस बात पर मम्मी से लड़ाई होती थी. पीरियड्स से जुड़ी बहत्तरों तरह की गलतफहमियां हैं. लेकिन ओडिशा में पीरियड्स का त्यौहार मनाया जाता है. इस नेच्युरल प्रोसेस को सेलेब्रेट किया जाता है. कितनी खुशनुमा सी खबर है ये. ‘ब्रीज ऑफ फ्रेश एयर’.

रज-पर्व: जब 3 दिनों तक भूदेवी के पीरियड्स आते हैं

ओडिशा के लोग मानते हैं कि पृथ्वी भगवान विष्णु (भगवान जगन्नाथ) की पत्नी हैं. देवी हैं. भूदेवी. जब गर्मियां ख़त्म होने वाली होती हैं. मानसून आने को होता है. कहा जाता है कि उस वक़्त भूदेवी को पीरियड्स आते हैं. 3 दिनों तक. इसीलिए इस दौरान उनको आराम करने की ज़रूरत होती है. इन 3 दिनों में कटाई, बोआई या जमीन से जुड़ा इस तरह का कोई काम नहीं किया जाता जिससे उनको तकलीफ हो. घर की लड़कियों और औरतों को भी इस दिन आराम दिया जाता है.
जब किसी औरत को पीरियड्स होते हैं उसको उड़िया भाषा में रजस्वला कहा जाता है. वहीं से ये शब्द आया है. रज. और इसीलिए इस त्यौहार को कहा जाता है रज-पर्व. पीरियड्स का त्यौहार. 
गांव के एक बुज़ुर्ग ने बताया था कि ये त्यौहार किसानों और फसलों से भी जुड़ा हुआ है. पीरियड्स होने का मतलब है कि लड़की चाहे तो एक नई ज़िन्दगी को पैदा कर सकती है. वैसे ही इस त्यौहार का मतलब है कि हमारी पृथ्वी फर्टाइल है. इसमें फसलें उग सकती हैं. इस त्यौहार  से पहले सारी फसलें काटी जा चुकी होती हैं. इस दौरान किसान आराम करते हैं. घर की औरतें भी आराम करती हैं. और ज़मीन भी आराम करती है.



र दिनों का फेस्टिवल. हर दिन के अलग-अलग नाम. और हर दिन अपने-आप में ख़ास.
जैसे रज-पर्व शुरू होने के पहले का जो दिन होता है उसको सज-रज कहा जाता है. पीरियड्स के पहले का दिन. इस दिन खाने की खूब सारी चीज़ें बना कर एक जगह स्टोर कर ली जाती हैं. पुराने ज़माने में यही स्टोर किया हुआ खाना आगे के 3 दिनों तक खाया जाता था. लड़कियां अच्छे से तैयार  कपड़ों और गहनों से सजती है. घर की ज़मीन का कोना साफ़ किया जाता है. उसको भी अच्छे से सजाया जाता है. आने वाले तीन दिनों के लिए उसको तैयार किया जाता है. मेरी दोस्त की मम्मी ने बताया था कि ऐसा करने से पीरियड्स के दौरान भूदेवी को दर्द और तकलीफें कम होती हैं.
पर्व का पहला दिन होता है पहिली रज. दूसरा वाला दिन, मिथुन संक्रांति और तीसरा दिन जिस दिन पीरियड्स ख़त्म माने जाते हैं उसको कहते हैं बासी-रज. इन तीन दिनों में लड़कियां अच्छे-अच्छे कपड़े और गहने पहनती हैं. सजती हैं. मेहंदी लगाती हैं. झूला झूलती हैं. घर के काम से उनको इन 3 दिनों की छुट्टी मिल जाती है. अपने दोस्तों के साथ दिन भर बैठ कर बातें करती हैं. हंसती हैं, खूब मस्ती करती हैं. शहरों में त्यौहार कम ही दिखता है. असली मज़ा गांव में ही आता है.
इस फेस्टिवल की सबसे अच्छी चीज़ है खूब सारी वैरायटी का खाना. ओडिशा की सबसे स्पेशल डिश है पीठा. चावल के आटे से बनी हर मीठी, नमकीन डिश को पीठा कहते हैं. पोड़ पीठा, चकुली पीठा, मंडा पीठा, आसिरा पीठा. ये लिस्ट ख़त्म ही नहीं होती. रज-पर्व में सबसे ज्यादा पोड़ पीठा बनता है.
रज में पान खाना भी ट्रेडिशन का एक हिस्सा है. मीठे पान में भी दसियों चॉइस होती है. खाने के बाद अगर मीठे की तलब होती हो तो वो भी सिर्फ पान खा कर ख़त्म हो जाएगी.
घरों के आस-पास और गांव भर में जगह-जगह झूले लगते हैं. मेला लगता है. घर का हर मेम्बर इन 3 दिनों में पूरे एन्जॉयमेंट के मूड में रहता है.


Thursday, August 30, 2018

中美应停止口水战,立即减排

在美国、澳大利亚和加拿大等发达国家,反对本国应做出减排承诺的人士会搬出几个关键论据抵制拟议中的气候变化政策。

有些人表示,目前尚无充足的科学论据证明人类行为与气候变化之间存在因果联系;也有些人认为,有关气候变化政策的成本高昂。

“高成本”论认为,拟议中的减排政策会导致国内生产总值大幅降低,减少就业机会,或使某些产业无以为继,从成本收益以及其他社会福利最大化的层面而言得不偿失,亦或降低温室气体排放的成本太高。

另一种常见的观点认为,要求美国或其他一些国家承担减排的成本是不公平的,除非中国和印度等国也愿意做出类似的行动。

从道义的角度来看,这些观点根本站不住脚。

为什么我们不应该计算减排成本

所有国家都有责任根据其在全球温室气体排放中所占的比重采取相应的减排行动,因为任何国家都负有不损害他国及他国人民的道德义务。

诸多道德理论和国际法中都有这种义务。例如《联合国气候变化框架公约》就指出,各缔约国一致同意“有义务保证在其司法辖区或者管辖区内所发生的活动不会对国家司法辖区界线之外的其他国家或者地区造成损害”。

政府间气候变化委员会)近期的一项研究结论也提出:“故意给他人造成损害或风险,已经预见到其行为后果却仍未停止行动,或者在某些情况下不顾其行为的负面后果给他人造成损害的,道德常识(以及法律实践)均要求这些人为其行为负责。”

成本论几乎总是围绕自身利益展开的,忽视了对他人的义务和责任。然而,国家或者个人是否应该采取行动避免气候变化,不仅仅只是对经济效率和国民福利最大化的考量,更是一个公义问题。某些政府和个人对气候变化负有更多的责任,原因在于他们的温室气体排放总量、人均排放水平和历史排放量均高于其他国家和个人。

世界上一些最贫困的国家几乎从未做过任何引起气候变化的事情,却最容易遭受气候变化带来的影响。如果他国政府和个人拒绝减少温室气体排放,这些贫困国家的人民将会受到更加沉重的打击。以减排成本太高为借口拒减排,这些贫困国家是不会同意的。

当然,如何确定各国在全球温室气体排放中所占的比重事关责任分配是否公正的问题,理性的人们或许会对不同国家的比重大小有着不同看法。一些排放量非常低的国家和人民或许认为自己还不需要减排,2050年之前,全球温室气体排放量要减少95%才能避免危险的气候变化。这一事实决定了几乎所有国家目前的排放量都超出了安全的水平。尽管如此,任何国家对公正的判断仍需经过道德标准的检验。

近期的报告指出,伦理学著作中提及的要素在决定减排责任的分配中同样适用。内容包括:造成气候问题的责任;减少温室气体排放的财力;平等或者给予每个人公平的大气温室气体排放权;还有发展的权利——这个概念通常被理解为免除穷国的减排义务,来满足其基本的发展需要。

换言之,伦理学家认为,从道德层面而言,只有有限的几个要素与全球温室气体减排问题有关,而高排放国家减排的成本问题并不在其中。

为什么我们不应该等待别人行动

无论其他国家采取怎样的行动,所有温室气体排放量超过安全限度的国家都有责任立即减少其温室气体排放。因为控制气候变化不仅仅事关国家利益,更事关全球公义。

停止加害行为的责任不以他人是否停止加害行为为前提。好比有两家企业同时排污毒害下游居民,其中一家企业辩称,除非另外一家企业同意采取类似的行动,否则自己没有义务减少有毒污染物排放,这种说辞荒谬至极。再好比两个殴打无辜受害人的暴徒,其中一人辩称在另外一个人仍在行凶的情况下自己没有停手的责任,这种托辞也是毫无说服力的。

气候变化的情况与上述两个案例类似。一些高排放国家对一些自我保护能力较弱的低排放国家造成了严重的伤害。因此,对于一些高排放国家用“其他高排放国家也没有减少排放”的理由为自己寻找借口的做法,那些受到伤害的穷国完全有理由反对。

美国或者其他国家是否有理由拒绝根据其在全球温室气体排放中所占的比重减排,除非中国或者其他国家也采取同样的行动呢?答案是否定的。

中国或者其他发展中国家是否能以一个发达国家拒绝采取行动为由而不减排呢?答案也是否定的。

任何国家,包括美国和中国在内,其减排责任只有在其排放量低至足以避免气候危险变化的水平时才会终止。(虽然也有观点认为即便是在这样的情况下,一个国家也应该在能力所及的范围之内继续减排,以避免对其他国家造成灾难性的影响——人权理论要求国家政府即便本身没有过错,也要具备防止侵害人权行为的能力。)

美国和其他高排放国家不能真切地证明其排放量已经在安全范围之内,因而有责任立即采取行动减排。这是一种国际义务,与其他国家行为无关。

“除非其他国家也采取类似行动,否则美国不必减少其温室气体排放量”这一论点换种方式说就是,如果美国采取了行动但其他国家没有,那么易受气候变化影响的国家所遭受的损害仍不会有任何改观。这种说法是不正确的。任何国家超过合理安全水平的排放量都在加剧这一危害。尽管大多数伤害可能都是由那些拒绝承担应有减排量的国家所造成,但所有排放量超过其合理比重的国家都负有不可推卸的责任。

Tuesday, August 28, 2018

इन आठ तरीकों से बढ़ा सकते हैं दिमाग़ की क्षमता

आपके साथ कभी ऐसा हुआ है जब आप किसी का नाम या किसी जगह का नाम याद करने की कोशिश कर रहे हों और कुछ याद नहीं आ रहा हो.
ये कहा जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ यादाश्त कम होने लगती है, ऐसा होता भी है लेकिन आप अपने दिमाग़ को तंदरुस्त रख सकते हैं.
अगर आप अपने दिमाग़ की क्षमता बढ़ाना चाहते हों तो निम्नांकित तरीकों को अपनाइए-
व्यायाम करने से दिमाग़ बेहतर होता है. व्यायाम करने से दिमाग की कोशिकाओं के बीच आपसी संपर्क बेहतर होता है और नई कोशिकाओं का निर्माण भी होता है.
कार्डियो वाले एक्सरसाइज करने से आप ज़्यादा आक्सीजन लेते हैं और अगर ये एक्सरसाइज आप आउटडोर कर रहे हों तो आपको विटामिन डी भी मिलता है.
आप ऐसा ही बदलाव दूसरों के साथ अपने आइडिया बांटते हुए महसूस कर सकते हैं. दूसरों की मदद करके महसूस कर सकते हैं.
इस तकनीक का इस्तेमाल अभिनेता करते हैं. अगर आप कोई चीज़ मूवमेंट के साथ करें तो उसके याद होने की संभावना ज़्यादा होती है.
अगर आपको कोई प्रजेंटेशन देना हो या स्पीच देनी हो तो उसकी तैयारी के लिए अपने नोट्स टहलते हुए या डांस करते हुए याद कीजिए, साफ़ अंतर दिखेगा.
आप जो भी सुगर और एनर्जी का इनटेक लेते हैं उसका 20 फ़ीसदी हिस्सा सीधा दिमाग़ को जाता है, यही वजह है कि दिमाग़ की कामकाजी हालत ग्लूकोज के स्तर पर निर्भर करती है.
अगर आपका सुगर लेवल नियंत्रित नहीं है तो फिर आपका दिमाग कंफ्यूज हो सकता है. ऐसे भोजन खाना दिमाग़ के लिए बेहतर हो सकता है जिसके डोपामाइन केमिकल निकलता है.
ये बात भी ख़्याल रखें कि दिमाग़ की कोशिकाएं फैट से बनती हैं, लिहाजा खाने में फैट का इस्तेमाल नहीं छोड़े. इसके अलावा नट्स, सीड्स, नाशपाती और मछली दिमाग़ के लिए बेहतर होते हैं.
तनाव दिमाग़ के लिए बेहतर होता है, क्योंकि आपातकाल में ही आपका दिमाग़ तेजी से सोचता है. लेकिन ज़्यादा समय तक तनाव का रहना दिमाग़ के लिए बेहतर नहीं होता है.
इसलिए समय समय पर दुनिया से एकदम कट जाना बेहतर होता है, दिमाग़ को आराम मिलता है.
हालांकि इस वक्त आप दिमाग़ के दूसरे हिस्से को काम पर लगा सकते हैं, ये वो हिस्सा होता है जिसमें हम दिन में सपने देखते हैं, यह यादाश्त कायम रखने के लिहाज से बेहद अहम होता है.
दिमाग़ को तंदरुस्त रखने के लिए ज़रूरी है कि आप उसे चैलेंज करते रहें, नई चीज़ें सीखते रहें.
मतलब कोई नई भाषा सीखना या कोई नई कला सीख कर आप अपने दिमाग़ की क्षमता बढ़ा सकते हैं.
ये सब नहीं कर पाएं तो अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ ऑनलाइन गेम ही खेलकर देखिए.

Friday, August 17, 2018

特朗普“提名秀” 气候行动遇冷

可能是过去几十年中最备受关注、可能也是最为奇怪的共和党总统候选人加冕仪式。本周,除了许多缺席的著名人士之外,共和党人齐聚俄亥俄州克利夫兰,参加这场被评论人士称为“不同寻常的党代会”。会上或将推举轻率傲慢的知名亿万富翁唐纳德·川普成为共和党总统候选人,在今年十一月的总统大选中对抗民主党候选人希拉里·克林顿。

川普恐怕很难在总统选举中获胜。他大规模得罪选民(比如许多女性和少数族裔选民)的习惯以及按照各州人口加权计算的选举人团制度,意味着这位百无禁忌的地产开发商最终入住白宫的可能性微乎其微。

本文撰写时,
民调显示克林顿在多个川普在总统选举中必须赢下的州中处于遥遥领先的位置。

但是考虑到多数评论人士曾认为川普熬不过去年冬天的初选(而最终结果证明他兵不血刃地在初选截止几个月前就赢得了多数共和党代表的选票),以及近来席卷西方世界的反建制反弹(比如英国的“退欧”公投),这极具决断力的地产商也并非完全没有机会赢得大选。

共和党党代会上并不会对气候、能源、环境等具体议题提出新的或者完整的政策主张。毕竟党代会的目的是为了吸引全国选民支持党派的总统候选人,而不是商讨政策立场。

但我们必定会听到许多共和党右翼人士充满火药味的发言,关于为什么一定要在十一月的大选中打败希拉里·克林顿,以及为什么要摧毁巴拉克·奥巴马八年总统任期中推出的一些政策。

川普和许多共和党人认为气候变化不过是一场
骗局,认为美国可以也应该继续使用煤炭和石油,认为提高美国能源构成环保性的努力是行政部门违宪的滥用职权。对于他们来说,此次党代会无异于一个极佳的扩音器。

而对于期望美国兑现奥巴马总统做出的应对气候变化、推广低碳能源使用的世界各国来说,上述质疑气候变化的声音只会让他们感到后背一凉。

不过,虽然这个自封“川普大帝”的男人可能不会赢得大选,但我们仍然不能高兴得太早。

因为一连串立法者——其中包括不少反对气候变化行动的人士——已经决意要通过在国会进行
阻挠行动(包括限制对环境保护署的拨款以及在相关法案中添加旨在阻挠《清洁能源计划他本人的演讲中可能会简单提到气候、能源或者环境问题,但重点则有可能是引出民主党对煤炭和其他化石燃料的政策引起上百万人失业以及奥巴马政府禁止海底钻探阻碍了新就业岗位的创造和石油供给的安全。不过,川普周二晚的讲话可能主要还是会围绕其关于经济、全球贸易、法律与秩序、移民以及全球安全的大胆观点展开。众所周知,川普坚决反对风电(并且特别反对在他的高尔夫球场视野范围内安装风电机),并且会与国会共和党人密切合作阻挠或者挑战奥巴马总统的能源计划。他还曾威胁称要“撕毁这个参议院最有权势的共和党人是煤炭最坚定的辩护者,毕竟他代表的肯塔基州有煤炭行业传统。但是煤炭采掘在奥巴马任期之前就早已进入衰退期,但奥巴马任内麦康奈尔还是组织并推动了国会阻挠旨在降低美国碳排放的努力。考虑到阿巴拉契亚山脉地区的政治因素,麦康奈尔在煤炭问题上的立场是可以理解的,但他的努力越来越像是一种螳臂当车的无用功。煤炭目前处于腹背受敌的状态中:一边是煤炭本身的不经济(天然气更环保、储量更多、成本更低),一边是清洁空气立法的限制(按照规定,许多运行多年的火电厂都必须关闭)。”《巴黎协定》,导致奥巴马政府赶紧采取行动,以便在十一月大选之前尽可能推进协定承诺的落实。
》的附加条款)推翻奥巴马总统的环境政策,并继续支持与气候变化有关的诉讼案件。

包括共和党多数派领袖米奇·麦康奈尔在内的上述国会领导人将主导克利夫兰的党代会,并且无论最终谁入主白宫,他们都将坚定不移地继续支持化石燃料。

与此前许多届党代会不同,此次党代会上将几乎不会出现任何共和党温和派人士。他们中的一些人甚至不希望自己的党派赢得今年十一月的大选。

本周的党代会将很有可能成为唐纳德·川普一个人的表演。至于他的气候、能源和环境政策——如果他真的要在竞选期间提出这些政策的话——很可能将在临近十一月大选的时候才会浮出水面。

据专业人士分析,我们可能会从部分发言代表那里听到关于提高能源效率的粗略观点(以便进一步降低美国对于政局不稳的中东地区石油的依赖),以及一些改变化石燃料补贴制度的声音。但对于一个传统上一直在竞选活动中高度重视能源问题的党派来说,这点零星的看法远远不能说明问题。

中美两国将在二十国峰会前批准《巴黎气候协议》

本周末,美国总统奥巴马将应邀参加在杭州举行的二十国集团领导人峰会。据悉,中美双方有望在此期间就《巴黎协定》正式做出官方承诺。

此举有望增加两个全球最大的二氧化碳排放国在气候公约中的分量,同时向其他国家施压,敦促他们加快完成各自的协定批复进程。

选择在这个一年一度的全球大型经济体会议上做出这样的决定,不仅将平息美国政治团体中的质疑,同时也将避免气候协议受到未来政治风险的影响,其中最紧迫的无疑是11月8日举行的美国总统大选。

中美双方共同表示,将致力于实现《巴黎气候协定》目标,确保全球升温幅度不超过工业化前水平2摄氏度。此外,双方领导人还决定进一步围绕气候变化政策展开新的双边合作。

两个月后,美国总统奥巴马将正式结束其两届总统生涯。这项决议也为奥巴马树立的气候变化英雄人物形象画上了一个圆满的句号。

《政治家》报道,声明的具体时间计划尚未确定,中美两国谈判仍在继续。

而这份具有突破性意义的《巴黎气候协议》预计将于今年年末正式生效。

《巴黎气候协议》若要正式生效,成为国际法的一部分,就必须经过55个国家的正式批准,且这55个国家的温室气体排放量必须超过全球排放总量的55%。

截至9月1日,共有180个国家签署了《巴黎气候协定》,24个国家已经向联合国提交了批准书,但是这些国家的排放量累计仅占
全球温室气体排放总量的1.08%。(点击我们的博客,查看更多批复过程细节信息)。

然而,中美两国合计温室气体排放占全球总量的40%左右,若两国批准了该协定,则将推动整个协定朝最终目标迈出一大步。《联合国气候变化框架公约》缔约方会议第二十二次大会(COP22)将于11月在马拉喀什举办。要想保证协定在此次大会上生效,就必须在10月7日前达到上述两项门槛。

就在中美声明发布前3周,全球第6大碳排放国巴西正式宣布该国参议院通过了《巴黎气候协定》。与此同时,马绍尔群岛和马尔代夫等发展中小岛国家也迅速完成了协定的审议工作。

尽早批准协定将有效对冲全球面临的一些紧迫的政治风险,而目前最紧迫的风险就是美国大选。

共和党候选人唐纳德·特朗普( p)
俨然已经成了气候变化否定者和美国石油天然气利益的代言人,他们对《巴黎气候协定》条款的有效性以及签署国的真诚度都提出了质疑。

这位地产大亨曾经发推特表示:“全球变暖这个概念就是中国人创造出来服务他们自己利益的,这样他们就能让美国的制造业丧失竞争力。”特朗普(Trump)今年早些时候还曾对福克斯新闻表示:“中国对拯救气候变化根本没有做出一点帮助。他们把所有可以燃烧的东西都烧了;他们根本不在乎……同时,他们还要在价格上打压我们。”

今年7月举行的美国共和党大会发布了一篇名为《共和党平台》的文件 。这份66页的文件认为,煤炭是一种“清洁”能源资源,并且承诺保护采矿行业免受各种“激进反煤炭议程”的影响。

一旦协议正式生效,各参与国至少4年内都不得退出。

10月8日至14日,《蒙特利尔协定书》高层次会议将在卢旺达首都基加利举行。各国需要在这次大会上就取得更有魄力的成果展现出自己的决心。这次会议也是对与会各国能否协力削减强力温室气体——氢氟碳化物的一次测试。如果无法遏制氢氟碳化物排放,则全球所取得的减碳成果或将被彻底抹杀。

目前与会各方的目标就是提高行动魄力,明确2020年前的行动路线图。

欲知协议国最新批复信息,请点击世界资源研究所的巴黎气候协议批复追踪页面。